Monday, 26 December 2011

कुसंगति से बचना चाहिए


बुरे चरित्र वाले, अकारण दूसरों 
को हानि पहुँचाने वाले तथा अशुद्ध स्थान पर रहने वाले व्यक्ति के साथ जो पुरुष 
मित्रता करता है, वह शीघ्र ही नष्ट हो जाता है। आचार्य चाणक्य का कहना है मनुष्य को 
कुसंगति से बचना चाहिए। वे कहते हैं कि मनुष्य की भलाई इसी में है कि वह जितनी 
जल्दी हो सके, दुष्ट व्यक्ति का साथ छोड़ दे।

No comments:

Post a Comment